हुजूर ऐ अकरम सल्लाहू अलैय्ही वसल्लम ने निकाह को अपनी सुन्नत बताया है और फरमाया कि जिसने मेरी सुन्नत को ना पसंद किया वो हम से नही है.निकाह इस दुनिया के रिवायती ढंग से चलने का एक मात्र तरीका है जिसके द्वारा अल्लाह इस दुनिया को चला रहे है.मानव जाति को इज्जत और सम्मान देने का सबसे बहतरीन  तरीका महिला और पुरुष का वैध ढंग से मिलना है.निकाह तमाम नबियों की पसंदीदा सुन्नत है.निकाह के बाद  इन बातों को करना अल्लाह के नबी ने पसंद किया है.

  1. जो व्यक्ति साहिब –ऐ-हैसियत हो उसके के लिए निकाह करना सुन्नत है
  2. बालिग़ होने के बाद तत्काल निकाह करना सुन्नत है
  3. निकाह से पहले मंगनी का पैगाम भेजना सुन्नत है
  4. मंगनी का पैगाम लडके और लडकी दोनों तरफ से भेजना सुन्नत है
  5. नैक और शरीफ जोड़े की तलाश करना सुन्नत है
  6. चार निकाह एक साथ करना जायज़ है जबकि चारों बीवियों के हुकूक सही ढंग से अदा कर सकता हो
  7. विधवा से निकाह करना भी सुन्नत है
  8. रमजान के बाद वाले महीने यानी शव्वाल में निकाह करना अल्लाह के नबी ने पसंद किया है और इसको बरकत वाले भी बताया है
  9. जुमे के दिन बरकत और भलाई के लिए निकाह करना सुन्नत है अल्लाह के नबी इसको पसंद किया करते थे.
  10. निकाह के लिए ऐलान यानी रिश्तेदारों और दोस्तों को बताना अल्लाह के नबी नें पसंद किया है.
  11. मस्जिद में निकाह करने को अल्लाह के नबी ने पसंद किया है
  12. अल्लाह के नबी को वो निकाह पसंद है जो सादगी के साथ हो और उसमें हंगामा और दिखावा कम से कम हो.
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