हुज़ूर सल्लाहु अलय्ही वसल्लम ने फ़रमाया:जो शख्स यतीम के सर पर हाथ फैरे और सिर्फ अल्लाह के लिये फैरे तो जितने बालों पर उसका हाथ गुज़रा है उतनी ही नेकियाँ उसको मिलेंगी।और जो शख्स अपने पास रहने वाले यतीम लड़के या लड़की के साथ ऐहसान का मामला करे तो जन्नत में वह और मैं इस तरह रहेंगे जैसे शहादत की ऊँगली(अँगूठे के पास वाली ऊँगली)और बीच की ऊँगली पास पास है।

यतीम से से भलाई

हदीसों में और क़ुरआन की बहुत सी आयतों में यतीम के साथ भलाई करने की फ़ज़ीलत आई हैं,वह छोटे मासूम बच्चे जिनके माँ बाप में से कोई मर जाए तो उनके सर पर मोहब्बत के साथ हाथ फेरना ही सवाब का कारण बनता है।मासूम बच्चों के सर से जब साया उठ जाता है तो वह बहुत सी समाजिक बुराइयों में पड़ जाते हैं।लेकिन अगर कोई उनकी परवरिश और देखभाल करने वाला हो तो वह एक अच्छा सामाजिक इंसान बन जाता है।

यतीम खाने

दुनिया भर में आज बहुत से यतीम खाने पाये जाते हैं जहाँ यतीम बच्चों को छोड़ दिया जाता है और वह यतीम खाना उस बच्चे की देखभाल करता है फिर कोई या तो उस बच्चे को गौद ले लेता है या वह बालिग़ होजाता है।यह भी एक सवाब का काम है।ऐसी संस्थाओं की मदद करनी चाहिए।

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