हज़रत मोहम्मद सल्लाहु अलय्ही वसल्लम को दावत दीन के लिये बहुत मुशिकलें और मुसीबतें उठानी पड़ी है मक्का में तरह तरह से दुश्मन ऐ इस्लाम सताया करते थे तकलीफ और जँगल पहाड़ों की ख़ाक छानकर मदीने पहुँचें तो इस्लाम के दुश्मनों बदर,उहद,खन्दक,तबूक,खैबर के मैदानों में जँग लड़ी ।

जँग खेबर में भुने हुए गोश्त में ज़हर दिया गया।

बुखारी सहित अन्य तमाम विश्वासनीय हदीस की पुस्तकों में रिवायत है कि जँग ऐ खेबर के मौके पर एक यहूदी औरत ने एक भुनी हुई बकरी नबी पाक सल्लाहु अलय्ही वसल्लम को भेंट की जिसमें उसने ज़हर मिला दिया था,हज़रत मोहम्मद सल्लाहु अलय्ही वसल्लम ने उसमें से थोड़ा सा खाया तथा वहाँ मौजूद तमाम सहाबा ने भी साथ में खाया अचानक रसूल पाक सल्लाहु अलय्ही वसल्लम ने सहाबा से कहा अपना हाथ खींच लो(यह गोश्त मत खाओ)और फ़रमाया इस बकरी ने मुझे बताया है कि इसमें ज़हर मिलाया गया है।

बकरी का बोलना एक मोजीज़ा(करिश्मा)था

कटी हुई भुनी हुई बकरी का नबी पाक को ज़हर के मिले हुए होने की खबर देना एक मोजिज़ा था,नबी पाक की ज़िन्दगी में ऐसे बहुत से मौजिज़े हुए हैं जो दुनिया के लोगो को हैरान करके रख देते हैं।चाँद के दो टुकड़े होना,दरख्त का चलकर आना,मज़बूत पहलवान को चित कर देना आदि नबी पाक के मोज़ीज़ात में से है।

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