प्रतीक चिन्ह

एक बार नबी सल्लाहु अलय्ही वसल्लम खैबर के पास ठहरे हुए थे,हज़रत अली रज़ि के पैर की रान पर अपना सर रखकर सो गए,हज़ार अली रज़ि ने हुज़ूर अक़्दस की नीँद की वजह से हरकत ना की यहां तक कि शाम में सूरज के डूबने का वक़्त होगया था और हज़रत अली रज़ि अब तक असर की नमाज़ भी नही पढ़ी थी।
जब आप सल्लाहु अलय्ही वसल्लम नीँद से जागे और हज़रत अली से पूछा कि क्या तुमने असर की नमाज़ पढ़ी या नही?हज़रत अली जवाब दिया नही पढ़ी।हुज़ूर सल्लाहु अलय्ही वसल्लम ने अल्लाह से दुआ की या इलाही तू सूरज को लोटा दे,हज़रत असमा कहती है कि मैंने देखा सूरज डूबने के बाद फिर निकल आया और हज़रत अली की नमाज़ क़ज़ा होने से बच गई।

(इमाम तहावी ने इस हदीस को अपनी किताब में नक़ल किया है)

नबी पाक की को अल्लाह ने अपनी तरफ से बहुत से मोअज़ीज़ात दिए हैं जिनके बारे में पढ़कर ईमान में ताज़गी होती है।

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