आगरा में स्थित मोहब्बत की निशानी ताजमहल के निकट निर्माणधीन मल्टीलेवल पार्किंग पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख लहज़े में टिपण्णी की है। साथ ही ताजमहल के निकट हजारों पेड़ काटने की भी इजाजत मांगी गई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़गी का इज़हार करते हुए निर्माणधीन पार्किंग को चार हफ्ते के अंदर अंदर ढहाने के आदेश देते हुए कहा है कि ऐतिहासिक धरोहर के पास निर्माण व पेड़ों की कटाई की इजाजत देने के लिए क्यों न ताजमहल को ही कहीं शिफ्ट कर दिया जाए।

यूपी सरकार के वकील पर जताई नाराज़गी

पीठ ने यूपी सरकार के वकील की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी जताई। बाद में यूपी सरकार की एडिशनल एडवोकेट जनरल ऐश्वर्य भाटी ने पीठ से गुहार की कि इस आदेश पर रोक लगाई जाए लेकिन पीठ ने फिलहाल इस पर रोक लगाने से इनकार किया। पीठ ने उनसे कहा कि वह इस संबंध में याचिका दाखिल करें। याचिका दायर करने के बाद इस पर विचार किया जाएगा।

नहीं ली गई थी पर्यावरण व सीईसी की मंजूरी 

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के वकील एडीएन राव ने पीठ को बताया कि बिना मंजूरी के पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके निर्माण से पूर्व न तो पर्यावरण मंजूरी ली गई और न ही सीईसी से ओर क्लीयरेंस लिया गया।

पर्यावरणविद एमसी मेहता की याचिका पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ताजमहल क्षेत्र में विकास कार्य की निगरानी कर रहा है। मेहता ने अपनी याचिका में ताज को प्रदूषित गैसों और आसपास हो रही पेड़ों की कटाई के दुष्प्रभावों से बचाने की गुहार लगाई थी। इससे पहले भी शीर्ष अदालत ताज की सुरक्षा के मुद्दे पर कई कड़े फैसले दे चुकी है।

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