दिल्ली।भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि भारत में रह रहे लगभग सभी 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों को बर्मा वापस नही भेजा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने लिखित आदेश में बिल्कुल साफ कर दिया कि अगर किसी रोहिंग्या शरणार्थी को अपने देश वापस भेजा जाता है तो वो कोर्ट में तुरंत सुनवाई के लिए अर्जी दाखिल कर सकता है।वही केंद्र सरकार का तर्क है कि कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों के तार आतंकी संगठन की गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं। साथ ही अगर ये शरणार्थी भारत में रहे तो वो यहां सस्ती मजदूरी करेंगे। इससे भारत के मजदूरों को नुकसान होगा। 

इस पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि इस मामले के तीन पहलू हैं, पहला है देश की सुरक्षा, दूसरा है आर्थिक मुद्दा और तीसरा है शरणार्थियों का मानव अधिकार। अगर वो आतंकी काम में लिप्त है तो बेशक सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करे। लेकिन शरणार्थियों में महिला, बच्चे, बूढ़े और बीमार लोग हैं। इन लोगों को पता भी नहीं कि ये सब क्या हो रहा है। हम एक संवैधानिक अदालत के नाते इस पर चुप नहीं रह सकते और हम उम्मीद करेंगे की सरकार भी इसे मानवता की दृष्टि से देखे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सरकार इन लोगों को वापस ना भेजे।

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