हज़रत अब्दुल्लाह इब्न उमर रज़ि.से रिवायत है कि रसूलुउल्लाह सल्लाहु अलय्ही वसल्लम ने रिशवत देने वाले और रिशवत लेने वाले पर लानत(अभिशाप)फ़रमाई है।

रिशवत के लेने देने वाले के बिचौलिया पर भी लानत 

एक दूसरी हदीस में हज़रत सोबान ने रिवायत किया है कि रसुलउल्लाह ने उस शख्स पर भी लानत फ़रमाई है जो रिशवत लेने और देने वाले के बीच मामला तय कराने वाला हो यानी बिचौलिया हो।

रिशवत पर दोज़ख का अज़ाब

रिशवत लेने और देने वाले दोनों जहन्नुम की आग में झोंके जाएँगे,(तबरानी-अल मुअज्जम अल कबीर)

ज़ुल्म से बचने के लिये रिश्वत दी जासकती है

जहाँ बगैर रिशवत के दिए बगैर ज़ालिम के ज़ुल्म से ना बचा जासके वहाँ दिल से बुरा समझते हुए रिशवत देना जायज़ होगा मगर रिश्वत का लेना बिलकुल हराम है।

अल्लाह के नबी का फरमान सच्चा है,रिशवत समाज की सबसे बड़ी बुराई है जिसके द्वारा हक़ वाले को उसका हक़ नही मिलता है,रिशवत समाज को सुस्त काहिल और निकम्मा बना देती है जिसके कारण इस्लाम में लेने और देने दोनों को हराम क़रार दिया गया है।

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