ऑल इंडिया मजलिस-ए-एत्तेहादुल मुसलमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदउद्दीन ओवैसी की पहचान मीडिया के द्वारा एक कट्टर हिन्दू विरोधी बना दी है,जिसके कारण उन्हें हिंदुओं के खिलाफ समझा जाने लगा है,इस बारे में सांसद ओवैसी ने स्पष्ट रूप से कहा कि मैं हिंदुओं के खिलाफ नहीं हूं, बल्कि उन ताकतों के खिलाफ हूं जो भारत को एक हिंदू राष्ट्र बना देना चाहते हैं। भारत की पहचान यहां की विविधता है और जो इसे खत्म करना चाहते हैं मैं उनके खिलाफ हूं।

लखनऊ लिटरेरी फेस्टिवल के कार्यक्रम में लखनऊ आए हैदाराबाद के सांसद ओवैसी का कहते हैं। सरकार ने लिटरेरी फेस्टिवल पर रोक लगाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को कुचलने की कोशिश की है। ओवैसी ने कहा कि सपा-भाजपा एक ही सिक्‍के के दो पहलू हैं जो कि हर असहमति की आवाज को दबा देना चाहती हैं।

ओवैसी ने बताया कि जब यूपी में सपा की सरकार थी तब भी मुझे यहां आने से रोका गया। जबकि मैं कहता हूं कि अगर मैं कुछ गलत करता हूं तो मेरे खिलाफ केस करवाइए मुझे जेल में डाल दीजिए, लेकिन कुछ बोलने से रोकना संवैधानिक अधिकारों का हनन है, जो कि फासिज्म है।

ओवैसी ने ताजमहल विवाद पर कहा कि इस तरह के विवाद असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए किए जा रहे हैं। अगर ताजमहल भारत की संस्कृति पर बदनुमा दाग है तो लालकिला भी है। लखनऊ की ये तहजीब इसे आप क्या कहेंग।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर में बच्चों को इलाज न मिलने से उनकी (बच्चों की) मौत हो गई, कोई तालीम की बात न करे, महंगाई की बात न करे… इसलिए जरूरी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह की बयानबाजी की जाती है।

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