महेश गुंडलपुर कर्नाटक निवासी जो अब रफ़ीक बन चुके है, इन्होंने इस्लाम को कुबूल किया और और इस्लाम को अपनी ज़िन्दगी को जरुरी हिस्सा बनाया। अब इनके द्वरा इस्लाम क्यों अपनाया गया ?

आइये सुनते है पूरी दास्ताँ। रफ़ीक़ ने बताया की उन्होंने इस्लामिक के साथ सभी धर्म का गहन अध्ययन किया, इसके बाद वह इस इस निष्कर्ष पर पहुंचे की इस्लाम एक अच्छा मजहब है। उसके बाद रफ़ीक़ ने इस्लाम की जरुरी जानकारी के इस्लामिक ट्रेनिंग सेंटर में दाखला लिया और इस्लाम के जरुरी अहकाम को सीख।

रफ़ीक़ लगभग चार साल पहले मुसलमान हुए, अब रफ़ीक़ चाहते है, की उन के माता पिता भी इस्लाम को कुबूल करें, मगर अभी तक उन परिवार ने इस्लाम को अपनाया नहीं है, रफ़ीक़ ने इस्लाम के बारे में अपने घर परिवार वालों को बताया है, रफ़ीक़ को इस बात का यकीन है, की उस के परिवार के लोग इस्लाम को अपनाएंगे।

रफ़ीक़ ने जिस जगह से इस्लाम की जानकारी ली उस संस्था को चलाने वाले अली कोय जो की पिछले चालीस वर्षों से इस संस्था को चला रहे है, उन का कहना यह है की वह सब काम कानून के दायरे में रहकर करते है, और लोग अपनी मर्जी से इस्लाम को कुबूल करते है,और जो लोग इस्लाम को कुबूल करते है हम उनका किर्मिनल रिकॉर्ड मालूम करते है, कही उनका किसी भी प्रकार से चरमपंथी लोगों से जुड़ाब तो नहीं है, और सभी जरुरी दस्तावेज मौजूद होने के बाद इस्लाम को कुबूल करने वालों के परिवार से भी बात करते है.

उस के बाद सभी क़ानूनी प्रकिर्या को पूरा करने के बाद ही धर्मपरिवर्तन कराते है, अगर उस के बाद भी वह इस्लाम से खुस नहीं है, तो वह वापस अपने धर्म की तरफ लौट सकता है। इस्लाम में किसी भी प्रकार की कोई जबरजस्ती नहीं है।

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