एशिया की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था दारूल उलूम देवबंद ने अपनी कार्यसमिति  में आज छह नए सदस्य शामिल कर् हैं।  हक़ीक़त डॉट कॉम के अनुसार कार्यसमिति के सदस्यों में बिहार से मौलाना असरारुल हक कासमी, देवबंद डॉ सैयद अन्ज़र हुसैन, राजस्थान से मौलाना महमूद, गुजरात से मौलाना निजामुद्दीन खामोश और बंगाल से मौलाना अब्दुल हई शामिल हैं। हालांकि अभी तक बाक़ी लोगो के नामों में बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। कुछ सूत्रों से पता चला है कि छह के बजाए पांच नये सदस्यों का चयन किया गया है।

 दारुल उलूम देवबंद के प्रवक्ता श्री अशरफ उस्मानी से संपर्क किया तो उन्होंने नाम बताने से इनकार कर दिया और कहा कि अब किसी चुनाव सदस्य के नाम का खुलासा नहीं किया जा सकता है, दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी कोशिश के बावजूद संपर्क नहीं हो सका, देवबंद पत्रकारों को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर मौलाना असरारुल हक कासमी के सदस्य बनाए जाने की खबर वायरल रही है इस बारे में जब मौलाना के करीबी लोगो और ऑल इंडिया तालीमी मिल्ली फाउंडेशन राज्य के सचिव मौलाना नौशेर, उन्होंने कहा हमें भी व्हाट्सएप्प से ही सूचना मिली है, अभी तक दारूल उलूम देवबंद की ओर से कोई पत्र या फून प्राप्त नहीं हुआ लेकिन उन्होंने बड़े वसूक़ के साथ कि मौलाना का सदस्य वीरता चयन किया जाना सुनिश्चित है।

सोशल मीडिया पर एक ओर जहां मौलाना इसरारुलहक़ कासमी को सदस्य बनाए जाने पर खुशी व्यक्त किया जा रहा है वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अगर दस पंद्रह साल पहले उन्हें निर्वाचित किया जाता तो इसकी उपयोगिता दुगनी होती।

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