बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा विरोधी राजनीति के केंद्र बनने लगे हैं। मोदी सरकार के खिलाफ़ खुल कर बोलने वाले नीतीश कुमार ने दिल्ली में आयोजित बड़ी इफ्तार पार्टी में तमाम नेताओं को एकजुट कर यही संदेश देने की कोशिश की है। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद से दिल्ली के लुटियंस ज़ोन में इफ्तार पार्टियों का चलन कम हुआ है। मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री निवास में हेने वाली इफ्तार पार्टी बंद करा दी थी। इस बार कांग्रेस ने भी हर साल होने वाली अपनी इफ्तार पार्टी रद्द कर दी। ऐसे मे नीतीश का पटना के बाद दिल्ली में बड़े पैमाने पर इफ्तार की दावत देने को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में वो ही भाजपा विरोधी राजनीति के केंद्र होंगे।

जनता दल यूनीइटेड के पूर्व अध्य शरद यादव के घर दी गई नीतीश कुमार की दावत-ए-इफ्तार में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अपनी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नीतीश सरकार में मंत्री अपने दोनों पुत्रों तेजस्वी तथा तेज प्रताप के साथ शामिल हुए। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस इफ्तार पार्टी मे नज़र नहीं आए। उनकी ग़ैर मौजूदगी से माना जा रहा हैल कि वो नीतीश की अगुवाई वाली भाजपा विरोधी राजनीति का हिस्सा नहीं बनना चाहते। हालांकि केजरीवाल ने कई मौकों पर नीतीश का समर्थन किया है। वो बिहार जा कर नीतीश के साथ मंच भी साझ कर चुके हैं। लेकिन तब मंच पर लालू प्रसाद यादव से गले मिलने पर उनकी खूब किरकिरी हुई थी। लगता इसी वजह से केजरीवाल नीतीश की दावत-ए-इफ्तार मे शामिल नहीं हुए।

इस रमजान सत्ता और सियासत के गलियारों वाले लुटियंस ज़ोन में नीतीश कुमार की तरफ से दी गई ये पार्टी सबसे बड़ी इफ्तार पार्टी है।

गुरूवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इफ्तार पार्टी है। पहली जुलाई को राष्ट्रपति भवन में प्रणव मुखर्जी ने इफ्तार की दावत रखी है। दो जुलाई को आरएसएस से जुड़ी संस्था राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की इफ्तार पार्टी है। राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की इफ्तार पार्टी पहले पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को इफ्तार की दावत देने और बाद में पांपोर पर उनके विवादित बयान के बाद उन्हें इफ्तार में आने से मना करने के चलते विवादों में आ गई है।

आम तोर पर बड़ी इफ्तार पार्टियों में प्रधानमंत्री के शिरकत करने की परंपरा रही है। लेकिन नरेंद्र मोदी ने ये परंपरा तोड़ी है। उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद ये तीसरा रमज़ान है लेकिन प्रधानमंत्री ने किसी भी इफ्तार मे शिरकत नहीं की।

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की तरफ से दी जा रही इफ्तार पार्टी मे तो इस बार प्रधानमंत्री को न्योता ही इस लिए नहीं दिया गया कि अगर वो शामिवल नहीं हुए तो बेवजह उनकी ग़ैर मौजूदगी मुद्दा बनेगी।

राष्ट्रपति की इफ्तार पार्टी में प्रधानमंत्री शामिल होंगे या नहीं इससपर अभी संशय है।

अपनी कीमती राय देना न भूले ! शुक्रिया
loading...