नई दिल्ली: जमीअत उलेमा हिंद द्वारा इंदिरा इंडोर स्टेडियम नई दिल्ली में शांति एकता सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें हिन्दू मुस्लिम, सिख ईसाई अन्य सभी धर्मों के एहम जिम्मेदारों ने शिरकत की। इस अवसर पर एक संयुक्त घोषणा नामा पढ़ा गया, जिसके बाद स्टेडियम में मोजोद सभी लोगों ने हाथ उठाकर आपसी शांति व मोहब्बत को बढ़ावा देने के लिए हर संभव मदद करने का यक़ीन दिलाया जहां कहीं भी हिंसा, घृणा, उग्रवाद और भेद पाएंगे, इसे रोकने की कोशिस करेंगे। लिखित घोषणा पत्र में कहा गया कि मासूम बच्चों, महिलाओं और पुरुषों में किसी भी प्रकार की हिंस, भारतीय संस्कृति तथा मानवता और इस्लाम के खिलाफ है.

तमाम धर्मों एवम् विचारधार के लोग आये

इस सम्मेलन में दारुल उलूम देवबंद, नदवातुल उलेमा, लखनऊ,अजमेर शरीफ, गुलबर्गा शरीफ और सरहिन्द शरीफ की अहम भागीदार हुई, वहीं प्रसिद्ध हिंदू नेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती,जत्थेदारअकाल तख़्त,अमृतसर के प्रमुख सिंह साहिब ज्ञानी गुरुबचन सिंह जी, स्वामी मित्रानन्द जी, आचार्य लोकेश मुनि,हमेशानन्द आचार्य जी,बौध्सिट नेता सहित अन्य कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रही।  इस अवसर पर

नफरत फैलाने वालों पर प्रतिबन्ध लगे

सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे जमीयत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मन्सूरपुरी ने कहा कि सांप्रदायिकता इस देश के विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए जमीअत उलेमा हिंद तीन बातें कहना चाहती है सबसे पहली अनुरोध तो सरकार है, हम सरकार से मांग करते हैं कि देश में सांप्रदायिकता फैलाने वाले तमाम संगठन जो  अल्पसंख्यकों, दलितों या कमजोर वर्गों पर अत्याचार और शोषण कर रहे हैं पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगना चाहिए।

तमाम लोग मोहब्बत का पैगाम आम करें

दूसरी गुज़ारिश देश के सभी राजनीतिक और बौद्धिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से  है कि वह अपने राजनीतिक, व्यक्तिगत या व्यावसायिक हितों से ऊपर उठकर प्रेम संदेश को आम करें, तीसरी अनुरोध मिल्लते इस्लामिया के सभी व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों से है कि मौजूदा हालात में हर तरह की मायूसी और ज़्ज़्बातीयत से अपने आपको बचाकर इस्लामी शिक्षाओं पर पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहें और इस्लामी परंपराओं के अनुसार सभी धर्मों के मानने वालों के साथ अच्छा सुलूक और अख़लाक़ पेश करें।

विचारधार से कोई समझोता नही:मौलाना महमूद मदनी

 महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने अपनी तक़रीर आपसी शांति और प्रेम और भाईचारा को बढ़ावा देने ने  का भरोसा दिलाया ।मौलाना मदनी ने मंच पर मौजूद सभी धर्मों के नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज यहां देवबंद भी मौजूद है और ऋषिकेश भी, यह इस बात को साबित करता  है कि इस देश के बहुमत शांतिप्रिय लोगों की है। अगर कोई हमारे चमन को उजाड़ने की कोशिश करता है तो इस देश के लोगो की बहुमत है उनका इलाज करने की शक्ति रखती है ।मैं कहना चाहता हूँ कि के भारत के मुसलमानों को सबसे ज़्यादा अगर किसी चीज़ की जरूरत है तो हिंदू, सिख, ईसाई और पारसी भाइयों के प्रेम की है.इस अवसर पर मौलाना मदनी ने ऐलान करते हुए कहा कि एक बात सुन लें कि हम अपनी विचारधारा से एक इंच भी नहीं हटेंगे और ना राष्ट्र सम्मान के संबंध में किसी प्रकार की सुलह करेंगे।

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