नई दिल्ली:तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोग़ान ने पश्चिमी देशों के  नेताओं द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘इस्लामी आतंकवाद’ शब्द की कड़ी आलोचना की है । तय्यब ने कहा कि मुसलमान अन्य सभ्यताओं, संस्कृतियों और धर्मों के लिये कोई प्रयोगशाला नही है। तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘इस्लामिक आतंक’ शब्द का इस्तेमाल किया है, जिसकी तुर्की बार-बार निंदा करता है, लेकिन क्या यह पश्चिमी देशो के नेता ही बौद्धिस्टों के लिये बौद्ध आतँकवाद के शब्द के इस्तेमाल की हिम्मत रखते हैं, जो रोहंग्या मुसलमानों का नरसंहार कर रहे हैं।

राष्ट्रपति एर्डोगान ने कहा कि आज इस्लाम आतंकवाद, पिछड़ेपन और आंतरिक रूप से धार्मिक और राजनीतिक संघर्ष से पीड़ित है, और इसके लिए हमें एक क्षण के लिए शांति से नहीं बैठना चाहिए। तय्यब ने कहा कि सभ्यता ही एकमात्र ताकत है जो पूरी दुनिया में मानवता की रक्षा कर सकती है।

यह सुरक्षा परिषद के पांच सदस्य होने के लिए उपनिवेशवाद और वर्चस्व का प्रतीक है

तुर्की राष्ट्रपति ने सुरक्षा परिषद में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका की आलोचना की और केवल 5 स्थायी देशों को दिए गए वोट  के अधिकार की निंदा की। तय्यब एर्दोग़ान ने इसको औपनिवेशिक सत्ता के साथ वर्णित किया। राष्ट्रपति एर्डोगान ने यह भी कहा कि अतीत में औद्योगिक क्रांति के नाम पर वैश्विक शक्तियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हितों की प्रणाली जिसे आज लोकतंत्र के नाम से जाना जाता है ने उन के चेहरे लीपापोती को दूर किया है ,इस्लामी सभ्यता हमेशा जीवित होती है और इसकी नींव और सूत्रों के साथ मौजूद होती है।

Facebook Comments
SHARE