रियाद:ईसाई यहूदी इबादत गाह में नमाज़ पढ़ सकते हैं या नही इस बात पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं,कुछ उलेमा नमाज़ पढ़ने को जायज कहते हैं तो कुछ इसको नापसन्दीदा कहता हैं।दुनिया मे मुसलमानों का सबसे बड़े केंद्र सऊदी अरब के सीनियर उलेमा काउंसिल के सदस्य अब्दुल्लाह बिन सुलेमान ने इस सम्बंध में एक फतवा जारी करते हुए कहा कि मुसलमान गिरजा घरों और यहूदी इबादतगाह में नमाज अदा करना जायज़ है।

ऐतिहासिक हवाला पेश किया

अब्दुल्लाह बिन सुलेमान ने कहा कि पैगम्बरे इस्लाम ने नजरान से आने वाले ईसाई दल से मस्जिद में मुलाकात की और उन्हें इसमें युरोश्लम की तरफ मुंह करके नमाज पढ़ने की इजाजत दी थी।कुवैत के एक न्यूज़ पेपर अख्बरुल अंबिया में प्रकाशित फतवा में शेख अल्मानी का कहना था कि मुस्लिम, शिया, सूफी मस्जिदों सहित चर्च और यहूदी इबादतगाहों में नमाज अदा कर सकते हैं। उनहोंने कहा कि अल्लाह ने क़ुरआन पाक में इरशाद फरमाया है और हदीस मुबारक की रौशनी में हमें पता चलता है कि सारी जमीन अल्लाह की मिल्कियत है और अल्लाह इसको मुसलमानों के लिए मस्जिद बना दिया है।

इस्लाम रहम दिली और अमन ओ शांति का धर्म है

अब्दुल्लाह बिन सुलेमान ने आगे यह भी कहा कि इस्लाम रहमदीली और बरदाश्त करने वाला मजहब है। इसमें हिंसा, असहिष्णुता और आतंकवाद का थोड़ा सा भी गुंजाइश नहीं है। शेख-उल-इस्लाम ने मुसलमानों पर जोर दिया कि उन्हें इस्लाम के प्रचार प्रसार में बढ़ चढ़ कर भाग लें और नबी की रहमत की इस सुन्नत के अनुसार जिंदगी गुजारें।

Facebook Comments
SHARE