ऑल इंडिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदउद्दीन ओवैसी ने अयोध्या विवाद हल करने के लिए आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की कोशिशों को महज एक मजाक करार दिया है और कहा है कि उन्हें इस विवाद को सुलझाने की कोई अथॉरिटी नहीं है। श्री श्री को जोकर करार देते हुए ओवैसी ने कहा कि वे कुछ भी कर लें उन्हें उनकी इस कोशिश के लिए नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने वाला है।

रविशंकर पहले जुमार्ना भरो बाद में शांति की बात करना

ओवैसी के मुताबिक कुछ ऐसे लोग जो मुगल लिखना तक नहीं जानते मुगलों का वंशज होने का दावा करते हैं, और अयोध्या विवाद पर अपना पक्ष रखते हैं। ओवैसी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस मामले में पहले ही कह चुका है कि उसे किसी तरह का ऑफर स्वीकार नहीं है। इसलिए इस मुद्दे पर रविशंकर को पतंगबाजी नहीं करनी चाहिए। श्री श्री की खिल्ली उड़ाते हुए ओवैसी ने कहा, ‘पहले एनजीटी ने जो जुर्माना उनपर लगाया है वो उसे चुकाये फिर शांति की बात करें। ओवैसी के मुताबिक अयोध्या केस को सुलझाने के लिए मध्यस्थता के उनके प्रस्ताव को लेकर उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने वाला है।

असदउद्दीन ओवैसी ने यह बयान उस समय दिया  का जब श्री श्री रविशंकर ने सोमवार (13 नवंबर) को कहा कि वे 16 नवंबर को अयोध्या जा रहे हैं और इस विवाद को सुलझाने से जुड़ी बातें अबतक सकारात्मक रही हैं। पिछले महीने शिया वक़्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने बैंगलुरु में श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की थी और अयोध्या विवाद पर बात की थी। वसीम रिजवी ने कहा था कि वे भी इस विवाद को सुलझाना चाहते हैं और इस मुद्दे का ऐसा समाधान चाहते हैं जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो।

बता दें कि शिया वक्फ बोर्ड दावा करता है कि बाबरी मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनाया गया है और मीर बाकी शिया थे और 1528 से लेकर 1944 तक इसका प्रशासन शिया के पास ही रहा है। इसका मुतावल्ली भी शिया रहा है। इसलिए इस पर शिया वक्फ बोर्ड का अधिकार है और उसी अधिकार के तहत शिया वक्फ बोर्ड बातचीत कर रहा है।

हालांकि इस विवाद में सुन्नी वक्फ बोर्ड भी 1944 में कूद गया है। हाल ही में इस विवाद में शाहजादा याकूब हबीबुद्दीन नाम का शख्स कूद गया, जो कि खुद को मुगलों का वंशज बताता है और खुद को बाबरी मस्जिद का उत्तराधिकारी घोषित करता है। याकूब हबीबुद्दीन ने भी श्री श्री की इस विवाद में मध्यस्थता करने की पेशकश का स्वागत किया था। 22 अक्टूबर को याकूब हबीबुद्दीन ने भी इसी विवाद को लेकर श्री श्री से मुलाकात की थी।

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