ऑल इण्डिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी दक्षिणी भारत की सबसे पुरानी पार्टियों में से एक है,अगर यह कहा जाये कि मौलाना अब्दुल वाहिद ओवैसी और सुलतान सलाहुद्दीन ओवैसी ने अपने खून जिगर से सींच कर इसको पिछड़ों शोषित और अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज़ बनाया है तो इसमें किसी भी तरह की कोई ज़्यादती नही होगी।

हैदराबाद भारत में मुसलमानों का केंद्र रहा है जहाँ शिक्षा व्यापार इल्म औ अदब से बड़ी बड़ी हस्ती दुनिया में नाम कर चुकी हैं।उसी शहर में ओवैसी परिवार के संघर्ष पर अगर ना लिखा जाये तो गलत होगा।कोंग्रेस का पंजा पुरे देश में लहरहा था कोंग्रेस का विरोध इस देश में किसी गुनाह से कम नही समझा जाता था,इसको नहरू गांधी परिवार से लगाव कहें या फिर अंधभक्ति।ऐसे समय में एक आवाज़ शहर दक्कन यानी हैदराबाद से उठी जिसको दबाने के लिये कोंग्रेस ने हर वो हथियार और हथकण्डा अपनाया जो किसी भी उभरते हुए को कमज़ोर ही नही तोड़ सकता है।मौलाना अब्दुल वाहिद ओवैसी ने महीनों जेल की काल कोठरी में गुज़ारे तथा उनके नोजवान बेटे सुलतान सलाहुद्दीन ओवैसी पर पुलिस की लाठियाँ और बंदिशें ज़ुल्म करती गई लेकिन इन बाप बेटों के हौसले के आगे सब कमज़ोर पड़ गए आखिरकार हैदराबाद के मुसलमानों को ओवैसी परिवार पर भरोसा जताया नगर निगम के चुनाव में जिताकर हौसला बढ़ाया तथा इसके पार्टी ने अपने पांव फैलाने शुरू करे।

हैदराबाद लोकसभा सीट पर 6 बार MP बने सलाहुद्दीन ओवैसी

हैदराबाद की जनता ने ओवैसी परिवार पर भरोसा जताया और अपने बीच से सुलतान सलाहुद्दीन ओवैसी को सबसे पहले 1984 में भारत की आठवी लोकसभा में साँसद बनाकर भेजा।इस तरह सलाहुद्दीन ओवैसी लगातर 6 बार इसी सीट पर साँसद रहे दूसरी बार 1989 से 1991 तक तथा 1991 से 1996 तक और 1996 से 1998 तक फिर इसके बाद 1998 से 1999 तक और फिर आखरी बार 1999 से 2004 तक  साँसद रहे।

सियासत तो हमारे घर की लौंडी है।

सुलतान सलाहुद्दीन ओवैसी भारत की सियासत का एक भरोसेमन्द नाम रहा है,एक यशस्वी वक्ता कुशल व्यवहार और बेबाकी पहचान थी।सलाहुद्दीन ओवैसी बड़ी बेबाकी से कहते थे यह सियासत हमारी चोखट की लौंडी है।यानी हमारे से ज़्यादा सियासत राजनीती कौन जानता होगा।

असदउद्दीन ओवैसी 

शायद ही इस नाम से कोई ना वाकिफ़ हो,असदउद्दीन ओवैसी के चर्चे चौपालों में होते हैं,अपनों में होते हैं पराय लोगों में होते हैं,दोस्त मुहब्ब्त में तो दुश्मन क़ाबिलयत का लोहा मानकर इनका नाम लेता है।

भारतीय पार्लिमेंट में सबसे बावकार नाम साँसद रत्न प्राप्त असद ओवैसी के को हराने के लिये भाजपा तो पहले से बैचेन थी अब कोंग्रेस ने भी लोहे को लोहे से काटने का हथकण्डा अपनाया है।कोंग्रेस पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान,पूर्व मुरादाबाद साँसद मोहम्मद अज़हरुद्दीन को चुनाव लड़ाने का ऐलान किया है।लेकिन असदउद्दीन ओवैसी का कामों और हैदराबाद में उनकी मक़्बूलियत को देखकर लगता है कि उनको हराना डॉन को पकड़ने की तरह मुशिकल ही नही नामुमकिन है।आइये नज़र डालते हैं उनके चुनावी नतीजों पर।

मोदी लहर में दो लाख वोट से जीते थे

2014 के चुनाव में देश के बड़े बड़े धुरेनदर मोदी लहर में ज़मानत भी नही बचा सके थे लेकिन हैदराबाद लोकसभा सीट पर असदउद्दीन ओवैसी लगातार तीसरी बार 513868 वोट लेकर भाजपा बड़े नेता डॉक्टर भागवन्त राव को 2024454 वोट से हराया था।

ओवैसी पहली बार एक लाख वोट से चुनाव जीते थे

2004 में असदउद्दीन ओवैसी अपने पिता सुलतान सलाहुद्दीन ओवैसी की जगह हैदराबाद लोकसभा सीट पर चुनाव लड़े लोगों ने समझा ओवैसी चुनाव में मार खा जाएँगे सुलतान सलाहुद्दीन ने बेटे को गलत समय पर लड़ाया है लेकिन असदउद्दीन ओवैसी की मेहनत और सुल्तान सलाहुद्दीन की क़यादत से चुनाव में Aimim ने भाजपा को 100145 वोट से हराया।असदउद्दीन ओवैसी का मुक़ाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता G सुभाषचन्द्र जी से था जो आंध्रा प्रदेश की राजनीति में बड़ा स्थान रखते थे।

तेलगुदेशम के मुस्लिम प्रत्याशी को भी हराया

2009 में चन्द्र बाबू नायडू ने असदउद्दीन ओवैसी को हराने के लिये और हैदराबाद सीट को ओवैसी परिवार से आज़ाद कराने के लिये मुस्लिम चेहरे को मैदान में उतारा ज़ाहिद अली खान ने चुनाव में ओवैसी के समाने बिगुल बजाया इस चुनाव में ओवैसी के सर से बाप का साया उठ चुका था,29 सितम्बर 2008 को सुलतान सलाहुद्दीन ओवैसी का इंतेक़ाल होगया था।ओवैसी के लिये यह बहुत बड़ा हादसा था यह इम्तेहान को घड़ी थी सालार के बगैर चुनाव लड़ना और जीतना हैदराबाद की जनता का भरोसा क़ायम रखना असदउद्दीन ओवैसी की ज़िम्मेदारी थी।ओवैसी यह चुनाव लड़े और 30806 वोट लेकर ज़ाहिद अली खान 194196 वोट पर समेट कर 60821 वोट से जीत कर दुनिया को दिखा दिया कि सालार के नक़्शे क़दम पर चलकर बड़े से बड़ा मैदान जीता जासकता है।

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